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कोरोना महामारी से उपजा वर्तमान वैश्विक समसामयिक परिदृश्य

कोरोना महामारी से उपजे वर्तमान वैश्विक परिदृश्य ने मानव सभ्यता और उसकी भावी पीढ़ी के विकास की तैयारियों की पोल खोल दी है| आने वाला समय चुनौतियों भरा तो होगा ही साथ ही मानव सभ्यता को यह सोचने मजबूर कर देगा कि सभ्यता की प्रगति का दम्भ जो हम लगातार भर रहे थे, उनकी सच्चाई क्या है? क्या वैश्विक परिदृश्य और इतिहास में हुई संघर्षपूर्ण घटनाओ में क्रन्तिकारी बदलाव आया है,क्या पिछले अनेक दशकों में विश्व में हो रहे संघर्षों में एक गुणात्मक अंतर आया है। सबसे महत्वपूर्ण यह है कि अब राज्यों के मध्य होने वाले संघर्षों के स्थान पर ऐसी चुनौतियाँ उत्पन्न हो रही हैं जो पूरे मानव समुदाय को प्रभावित कर रही हैं। सैन्य खतरे हो सकते हैं किन्तु इनसे भी बड़े खतरे ग़ैर सैन्य प्रकृति के हैं। इनका परिणाम यह हुआ है कि राज्यों की सुरक्षा के स्थान पर मानव की सुरक्षा पर बल दिया जाने लगा है। कोरोना महामारी इसी क्रम में उपजी एक ऐसी समस्या है जो एक वैश्विक समस्या बनकर उभरी है। चीन से शुरू हुई यह महामारी लगभग पूरी दुनिया में विस्तार पा चुकी है। समस्या की प्रकृति ऐसी है कि इसे एक राज्य समाधान के समीप नहीं ले जा सकता है। चाहें वह सूचनाओं का आदान - प्रदान हो या चिकित्सकीय सहयोग; बिना पारस्परिक सहयोग के इससे पार पाना कठिन है। कोरोना ही नहीं बल्कि अनेक अन्य विषय जैसे आर्थिक स्थिरता, वैश्विक ताप वृद्धि , मानव अधिकारों का मुद्दा आदि हैं जिन्हे सामूहिक तौर पर हल किया जाना है। यदि चीन के बाद  इटली, स्पेन और ईरान ,ब्रिटेन और विश्व का सबसे शक्तिशाली देश अमेरिका जैसे देशों में कोरोना का संक्रमण गंभीर रूप ले चुका है तो यह इन देशों तक सीमित नहीं रहने वाला और  इस समस्या का कहर से कोई भी देश नहीं बचेगा, समस्या और समाधान दोनों एक तरह से दुनियाई बन गए हैं। 1997 में जब पूर्वी एवं दक्षिण पूर्व एशिया में वित्तीय संकट आया तो उसके प्रभाव अन्य जगहों में भी अनुभव किये गए थे। द्वितीय विश्वयुध्य के बाद पुरे विश्व में एक अविश्वास का माहौल बन गया था और शीत युध्य में बदल गया था ,क्या कोरोना महामारी की समस्या पूरे विश्व समुदाय में इतिहास की इस घटना की पुनरावृत्ति करेगी| क्या तनाव के नए युग का शुभारम्भ होगा,क्या आने कुछ वर्षो में विकास की परिभाषा में एक परिवर्तन देखने को मिलेगा और नई तैयारियों के साथ पूरा विश्व समुदाय समस्या के समाधान एकजुट दिखेगा| ये तमाम प्रश्न है जो मानव सभ्यता और विश्व समुदाय समक्ष खड़े है ,और अब समय आ चुका है पूरा विश्व वर्तमान समस्या की गंभीरता पर साझा  दृष्टिकोण रखते हुए विचार मंथन कर आने वाली भावी पीढ़ी के लिये इन चुनौतियों के समाधान में जुटे और नई तैयारियों के साथ वर्तमान समस्याओ का पूर्ण समाधान कर मानव सभ्यता को इन भयानक विषाणुओ से तो बचाये ही मानवता को सर्वोपरि रखते हुए विश्व शांति की दिशा में कारगर कदम उठाये | 

 लेखक-  Ravi Prakash Azad ( Director & Founder Azad Group

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